मैंने तुम्हारा हर आयाम देखा है ।

मैंने तुम्हारा हर आयाम देखा है

शिशु की भांति मेरी ओर दुपकते हुए भी और
वयस्क की भांति मुझे आश्रय देते हुए भी
हर्ष में खिलखिलाते हुए भी और
दुःख में अश्रु बहाते हुए भी
मेरा बच्चो सा व्यहवार करने पर
तुम्हारा मुझे सयानो सा लाड करते हुए भी और
खुद बच्चा बन कर मेरे से लाड पाने की अभिलाषा लिए हुए भी
कभी तुम मुझे संभाल लेते हो कभी मैं तुम्हे
कभी तुम बड़े बन जाते हो कभी मैं बड़ा बन जाता हूं ।
✍️…Nilesh.

स्त्री कब भाग जाना चाहती हैं ।

मेरे मित्र जो मुझसे पूछते हैं
क्यों फेमिनिस्ट
उन्हें मैं कहना चाहता हूँ कि
पूछना तुम कभी एक स्त्री से की वो अपने जीवन मे कहाँ कहाँ से और क्यों भागना चाहती थी
पहली बार जब किसी स्त्री का शारीरिक शोषण होता है तो वो शायद 3 से 6 साल के बीच की होती है और वो नही जानती की शारिरिक शोषण क्या होता है
जब वो 16-17 साल की होती है तब वो समझ पाती है कि उसके साथ कुछ गलत हुआ था तब वो भागना चाहती है उस स्मृति से
पूछना कभी की कितनी पीड़ादायक होती हैं ये स्मृति
जब घरों में लड़कियों को दरकिनार कर दिया जाता है ये कह कर की तुम यहाँ की नही हो उनके साथ मौलिक भेदभाव किये जाते हैं तब वो भागना चाहती हैं उस घर से भी
जब समाज के सामने पिता की इज्जत बेटी की पीड़ा से बड़ी हो जाती है तो उस परिस्थिति में भी भागना चाहती है एक
जब एक माँ अपनी बेटी को समझाती है कि अगर थोड़ा बहुत सहना पड़े तो सह लेना उस परिस्थिति से भागना चाहती है एक स्त्री
जब परिवार में चल रहे किसी बहस में एक औरत को ये कह कर चुप करदिया जाता है कि औरतों को क्या जरूरत है बोलने की, बुद्धि नाम की कोई चीज़ है कि नही! वहाँ से भाग जाना चाहती है एक स्त्री
और ऐसी बहुत सारी परिस्थितियां हैं जहाँ एक स्त्री हमेशा के लिए भाग जाना चाहती है।

मैं फेमिनिजम को सपोर्ट नहीं करता, और ना ही मैं कोई कट्टर फेमिनिस्ट हूं, बस महिलाओं की रेस्पेक्ट करना चाहिए, इस लाइन को लिखते समय कही भी मैं पुरुषो को नीचा नही दिखा रहा ।
#Respect_Women
✍️…Nilesh

शिव 🙏

शिव आदि हैं
और अनंत भी
वो मेरे मंदिर हैं और मन भी,
रूद्र काल हैं और काल का अंत भी
वो मेरे प्रिय हैं और सर्वोत्तम भी,
गौरी का अर्धांग हैं शंकर
और सृष्टि का कल्याण भी
मेरे अस्तित्व के निर्माता हैं और शरीर के प्राण भी।
✍️…Nilesh.

Pyaar .

तुम्हारा पहला प्यार तुम्हें विकल्प समझने लगे तो तुम छोड़ देना उसे, पर जो प्राथमिकता दें तुम्हें खुद से ज़्यादा उसे इसलिए मत छोड़ना कि वो तुम्हारा पहला प्यार नहीं है प्रेम संख्याओं में नहीं भावनाओं में खोजें।

Nilesh