मैंने तुम्हारा हर आयाम देखा है ।

मैंने तुम्हारा हर आयाम देखा है

शिशु की भांति मेरी ओर दुपकते हुए भी और
वयस्क की भांति मुझे आश्रय देते हुए भी
हर्ष में खिलखिलाते हुए भी और
दुःख में अश्रु बहाते हुए भी
मेरा बच्चो सा व्यहवार करने पर
तुम्हारा मुझे सयानो सा लाड करते हुए भी और
खुद बच्चा बन कर मेरे से लाड पाने की अभिलाषा लिए हुए भी
कभी तुम मुझे संभाल लेते हो कभी मैं तुम्हे
कभी तुम बड़े बन जाते हो कभी मैं बड़ा बन जाता हूं ।
✍️…Nilesh.

समर्पण

मेरे अन्दर की अच्छाई ही मुझे खा रही है,

लेकिन अच्छाई की परिभाषा क्या है

मैं नहीं जानता….

मैं जीवन और प्रेम दोनों को

बहुत मंद गति से समझा

और जब समझा,

तो समझा,

ये दोनों एक दूसरे से भिन्न है,

प्रेम मंझधार है, तो जीवन किनारा ।

हम प्रेम में होते हुए,

किनारा कभी नहीं पा सकते।

अगर पाना चाहते हैं,

तो प्रेम को प्राप्ति से परे होकर समझना होगा।

मैंने जीवन मे जो भी सिखा,

किसी न किसी के समर्पण से सिखा ।

मैंने वाहन सबसे ज्यादा सावधानी से तब चलाया,

जब मेरे काँधे पर सर रख के तुम सोई,

और जीवन को सबसे ज्यादा गंभीरता से तब लिया,

जब तुमने अपना हाथ मेरे हाथ मे सौंप दिया।

तुम्हारे होठों को चुमते हुए,

या तुम्हारी बाहों में लिपटते मैं वैसे ही होता हूँ,

जैसे कोई भक्त, अपने भगवान की सेवा के दौरान होता है।


मैं किसी स्त्री के साथ सशरीर होना,

उस स्त्री को पाना कदापि नहीं मानता,

उस स्त्री के ह्रदय में बस जाने को मानता हूँ।

ईश्वर की मूर्ति रख लेने से ईश्वर हमारा नहीं होता,

हृदय में रखकर पूजने से होता है।

मैं तुम्हें पाना नहीं चाहता..

मैं तुम्हारा हो जाना चाहता हूँ।

मैं समर्पण को प्रेम से बढ़कर मानता हूँ, समर्पण प्रेम का प्रतिरूप नहीं है, प्रेम समर्पण का प्रतिरूप है।

#Nilesh.

मुझे बस तू चाहिए ।

Mere dil me jo tere liye hai,
Tere dil me bhi vo ehsaas chaahiye.
Kuchh Pal ka nahi,
Mujhe har pal karne vaala Ishq chahiye.

Kullad me milne vaali chai jaisa,
Kisi Mandir me maatha tekne jaisa,
Kisi masjid mai dua karne jaisaa , sukoon chahiye.
Mujhe aur kuchh nahi bas tu chahiye,

Tu aaj bhi, aur kal bhi chahiye,
Mujhe tu bas tu chaaiye,

Mujhe har dafa har dam bas tu chahiye.
Na koi aur , na koi tere jaisa,
Na tujhse kam na tujhse accha chahiye,
Tum Jaisi ho mujhe vaisi hi chahiye,
Jayada kuchh nahi mujhe bas tu chahiye.

Mujhe tera roothna aur mera manana chahiye, Mujhe teri bikhri zulfain aur mera sawaarna chahiye,
Mujhe tere hothon ko choomna hi bas nahi,
Teri rooh tak me mera ashq chahiye,
Kuchh iss tarah bepanaah hoke mujhe bas tu chahiye.

Har suraj ki kiran me tu chahiye,
Har raat me tu chahiye,
Mai kholu jab bhi palkain apni,
Ya fir band karu palkain apni,
Mujhe apne sath bas tu chahiye.

Tu rab hai agar toh mujhe vo rab chahiye,
Tu aag me toh mujhe vo aag chahiye,
Jo kisi ki na ho bas meri ho,
Mujhe kuch es tarah tu chahiye.

Na heer Ranjha jaisa, na Laila Majnu jaisa, Mujhe bas tere mere jaisa pyar chahiye,
Jo mere naam se aaye,
Mujhe tere chehre par bas vo ek muskaan chahiye.

Mujhe apni har likhi shayariyo mai tera hi Noor chahiye,
Mujhe na tujhse koi shart na riwaayat chalaiye, Tu Jaisi hai meri hai, Mujhe bas tu chahiye..

Jiske godi mai sar rakhke mai ro saku,
Jisse din raat mai dil ka haal keh saku,
Jisko khone ka dar nahi jo na kabhi jaaye, Mujhe aisa koi tu chahiye.

Jiske pyar ki deewangi mai dooba ja sake,
Mujhe vaisa tu chaiye,
Jisko mai kabhi khoun na,
Humesa bas paaun mujhe bas vaisa tu chahiye.
#Nilesh.

इश्क़ है , बस बेइंतहा इश्क़ है..

उसकी “typing…” पर, खुशी से काँपती मेरी उँगलियाँ.. इश्क़ है,

उसकी “New profile pic” को मिनटों तक एकटक झाँकती पलकों की पंखुड़ियाँ.. इश्क़ है,

गुफ्तगू करने की अनगिनत ख्वाहिशों के बीच,

“online” होकर भी चीखती खामोशियाँ.. इश्क़ है..

जरा सी आहट पे, फोन पकड़ कर बैठ जाना, वो “notification” की टनटनाती घंटियां.. इश्क़ है..

कैसे हो? पूछने पर.. “iam fine” बताना लिख कर मिटाना, मिटा कर छिपाना, वो “draft” में बेबस पड़ी अनकही अर्जियाँ.. इश्क़ है..

उसका नाम सुन कर धड़कनों का बढ़ जाना,

और उसका नाम सुना कर दोस्तों की मन-मर्जियाँ.. इश्क़ है..

अनंत तक चलने वाली “convo” में..

“Hmm” और “Hanji” की तल्खियाँ.. इश्क़ है..

“Call” आने पे बावला हो जाना,

अलाना.. फलाना.. बतियाना दिल ही दिल में खिलखिलाना, वो बच्चों सी खुशियों वाली किलकारियाँ.. इश्क़ है..

हर रोज मुलाकात के लिए पूछना,

ना मिल पाने पर दिल ही दिल रो लेना और उसको महसूस तक ना होने देना… इश्क़ है..

मशरुफ़ियत कितनी भी भारी पड़े कैफ़ियत पूछने पर, बस इक बार “Last seen” देखने वाली बेचैनियाँ.. इश्क़ है..

सुबह सबसे पहले उठकर ” call log ” में उसका “call ” देखना….”इश्क” है..

हर सुबह की ” राधे राधे ” और देर रात की “Good Night ” इश्क़ है…

“इश्क़ है”, बस बेइंतहा इश्क़ है..

#Nilesh

Suno Tum Jaisi bhi ho Meri ho , Hindi Kavita