Pyaar .

तुम्हारा पहला प्यार तुम्हें विकल्प समझने लगे तो तुम छोड़ देना उसे, पर जो प्राथमिकता दें तुम्हें खुद से ज़्यादा उसे इसलिए मत छोड़ना कि वो तुम्हारा पहला प्यार नहीं है प्रेम संख्याओं में नहीं भावनाओं में खोजें।

Nilesh

कोई आए मुझे सँभाले प्यार में । एक गज़ल

वो मेरा नाम भूल जाए प्यार में
अजी सुनते हो यूँ पुकारे प्यार में

करे इस्लाह वो हमारी हर ग़ज़ल
किचन में सब्ज़ी हम बघारे प्यार में

जब उसने मुझको यूँ कहा पागल हो क्या?
मुझे कहना था हाँ तुम्हारे प्यार में

ज़रूरत क्या मुझे फिर उस काजल की जब
नज़र से वो नज़र उतारे प्यार में

कोई और हो या न हो पर होंगे गवाह
हमेशा चाँद और सितारे प्यार में

बनाए वो तो मुझको अच्छे लगते हैं
सभी पकवान अलूणे-खारे* प्यार में

मैं हो न जाऊँ सच में ही पागल कहीं
कोई आए मुझे सँभाले प्यार में ।

Geeta Govindam Or Wo Raat, Review or sukoon. Hindi

Geetha Govindam .
इस मूवी का आज रिव्यू नहीं लिख रहा, लिख रहा हूं अपना अनुभव ।
मूवी ऐसी हैं, जिसे आप अनगिनत बार देखो फिर भी आपको बोर नहीं करती ।
मूवी 2015 में आई थी, शायद आप लोगो ने जरूर एक न एक बार देख ही लिया होगा , मूवी इतनी खूबसूरत और प्यारी हैं, की आपके दिल में बस गई होगी । मूवी का हर एक सीन , हर एक कैरेक्टर , सब कुछ लाजवाब हैं ।
खास कर विजय , और रश्मिका का एक्टिंग ।
विजय देवरकोंडा ने इस फिल्म में अपना अब तक का सबसे प्यारा रोल प्ले किया है। इस फिल्म में वह बहुत ही नेचुरल लगे हैं।
* बात करते हैं गीता(रश्मिका मंदाना) की, फ़िल्म में उनके चेहरे से नजर ही नहीं हटती है। वो बहुत ही ज्यादा प्यारी लग रही थी। उनको फ़िल्म में कुछ करने की जरूरत ही नहीं थी उनकी आँखें बोल रही थी।
ये तो हुआ, मूवी है कैसी, अब मैं आप सब से उस रात के अनुभव के बारे में बताता हु, जब हमने साथ में मूवी देखी ।
उसको को मूवी देखना ज्यादा पसंद नहीं है, कैह सकते हैं, पूरे दिन घर के कामों में व्यस्त होने की वजह से टाइम भी नहीं मिल पाता , इस कारण से भी वो नहीं देख पाती ।
कई बार बोलने के बाद एक दिन मूवी देखने का फैसला हुआ ,
मूवी को मैं कई दफा पहले भी देख चुका हूं, मूवी मुझे हर – दफा एक अलग ही खुशी देती है ।
उसका ये मूवी पहली बार देखना था, रात के लगभग 11:30 हो रहे थे, घर के सारे कामों को खत्म करने के बाद वो आई , फिर हमने मूवी देखने की शुरुवात की, वो अपने बिस्तर पे लेटी हुई थी, मै अपने बिस्तर पे, दोनो के हाथ में मोबाइल, कानों में इयरफोन ।
दोनों एक साथ मूवी को प्ले किए, मूवी की शुरुवात से ही मूवी आपको ख़ुद के साथ जोड़ना शुरू कर देती है, ऐसा ही हम दोनो के साथ हुआ, धीरे धीरे मूवी आगे बढ़ती गई ।
मैं मूवी देख रहा था, पर सुकून उसकी हसी दे रही थी, जो मेरे कानों से होते हुए मेरे दिल को भा रही थी ।
( मूवी को देखने से पहले मैं उसे हमेशा ताना मारा करता था, की एक मूवी हैं, गीता गोविंदम , हमदोनो का केमिस्ट्री लगभग उस मूवी के कैरेक्टर जैसा ही है, जिस बात पे हो चिढ़ जाती थी ।)
धीरे – धीरे मूवी आगे बढ़ती गई, और राते गहरी होती गई, और उसकी हसी , वो हर एक बात पे मुझे कहना देखो न, कितना मज़ा आ रहा हैं, और मुझे उसकी वो ख़ुशी देख सुकून मिलना, मेरे लिए सबसे अच्छे और प्यारे अनुभव में एक हैं।
उसका मेरी कहीं बातो पे मुझे टोकना और मुस्कुराना ,
” कहां हम दोनों की केमिस्ट्री ऐसी है, हम तुम्हें इतना भी परेशान नहीं करते, और फिर रूठ जाना , मैं तुम्हें परेशान करती हु न, जाओ अब नहीं करूंगी, फिर मेरा उसको कहना, ओय बदमाश मुझे तुम्हारा रूठना, तुम्हे मानना बहुत पसंद हैं , और आप मुझे थोड़े ही परेशान करती हो । इतना सुन खुशी से उछल के उसका कहना, हा बस इसीलिए तो मैं तुम्हें परेशान करती हु , तुम्हें अच्छा लगता हैं, और तुम्हे पसन्द हो , और मैं न करू, ऐसा कभी हुआ हैं।
उसकी ये अदा देख मेरा मुस्कुराना ।
ऐसी ही सुकून भरी बातों के साथ मूवी आगे बढ़ती गईं ।
हम दोनों पास में नहीं थे, वो अपने घर मैं अपने , पर मूवी देखते टाइम ऐसा लग रहा था, वो मेरे पास बैठी हो, और दोनो साथ में बैठ देख रहे है, उसकी हंसी, उसका गुस्सा, सब कुछ मुझे करीब से फील हो रहा था,
इसी तरह हस्ते हुए पूरी मूवी कब खत्म होने को आ गई पता ही नही चला, वक्त भी बहुत हो चुका था । मूवी खत्म हुईं ।
खत्म होते ही उसने मुस्कुरकर कहा झूठा , परेशान करते नहीं और मुझे बोलते रहते हैं, अब तो और परेशान करुंगी , और मेरा कहना, करो न तुम ऐसे ही, फिर दोनो का साथ में हस्ते रहना ।
मुझे बहुत सी मूवी पसन्द है, जैसे:- 96 movie , मेरी लाइफ चेंजिंग मूवी हैं।
पर इस मूवी के कारण उस रात के बाद मेरे जिंदगी के एक अहम हिस्से बन गई, जो याद सुकून देती हो, याद कर मन प्रश्न हो जाता हो,
( ये हमारी पहली मूवी हैं जिसे हमने साथ देखा )
मुझे हमेशा याद रहेगी, एक एक पल इस मूवी को देखते टाइम तुम्हारा हसना, मुस्कुराना, और सब कुछ ।

और एक बात आप सब से, जब कभी आप लोगो का मन ठीक न हो और कुछ बहुत अच्छा देखने का मन हो तो इसे जरूर देखे। आपका दिल खुश हो जायेगा।
इतनी प्यारी मूवी है ।
✍️…Nilesh

समर्पण

मेरे अन्दर की अच्छाई ही मुझे खा रही है,

लेकिन अच्छाई की परिभाषा क्या है

मैं नहीं जानता….

मैं जीवन और प्रेम दोनों को

बहुत मंद गति से समझा

और जब समझा,

तो समझा,

ये दोनों एक दूसरे से भिन्न है,

प्रेम मंझधार है, तो जीवन किनारा ।

हम प्रेम में होते हुए,

किनारा कभी नहीं पा सकते।

अगर पाना चाहते हैं,

तो प्रेम को प्राप्ति से परे होकर समझना होगा।

मैंने जीवन मे जो भी सिखा,

किसी न किसी के समर्पण से सिखा ।

मैंने वाहन सबसे ज्यादा सावधानी से तब चलाया,

जब मेरे काँधे पर सर रख के तुम सोई,

और जीवन को सबसे ज्यादा गंभीरता से तब लिया,

जब तुमने अपना हाथ मेरे हाथ मे सौंप दिया।

तुम्हारे होठों को चुमते हुए,

या तुम्हारी बाहों में लिपटते मैं वैसे ही होता हूँ,

जैसे कोई भक्त, अपने भगवान की सेवा के दौरान होता है।


मैं किसी स्त्री के साथ सशरीर होना,

उस स्त्री को पाना कदापि नहीं मानता,

उस स्त्री के ह्रदय में बस जाने को मानता हूँ।

ईश्वर की मूर्ति रख लेने से ईश्वर हमारा नहीं होता,

हृदय में रखकर पूजने से होता है।

मैं तुम्हें पाना नहीं चाहता..

मैं तुम्हारा हो जाना चाहता हूँ।

मैं समर्पण को प्रेम से बढ़कर मानता हूँ, समर्पण प्रेम का प्रतिरूप नहीं है, प्रेम समर्पण का प्रतिरूप है।

#Nilesh.