समर्पण

मेरे अन्दर की अच्छाई ही मुझे खा रही है,

लेकिन अच्छाई की परिभाषा क्या है

मैं नहीं जानता….

मैं जीवन और प्रेम दोनों को

बहुत मंद गति से समझा

और जब समझा,

तो समझा,

ये दोनों एक दूसरे से भिन्न है,

प्रेम मंझधार है, तो जीवन किनारा ।

हम प्रेम में होते हुए,

किनारा कभी नहीं पा सकते।

अगर पाना चाहते हैं,

तो प्रेम को प्राप्ति से परे होकर समझना होगा।

मैंने जीवन मे जो भी सिखा,

किसी न किसी के समर्पण से सिखा ।

मैंने वाहन सबसे ज्यादा सावधानी से तब चलाया,

जब मेरे काँधे पर सर रख के तुम सोई,

और जीवन को सबसे ज्यादा गंभीरता से तब लिया,

जब तुमने अपना हाथ मेरे हाथ मे सौंप दिया।

तुम्हारे होठों को चुमते हुए,

या तुम्हारी बाहों में लिपटते मैं वैसे ही होता हूँ,

जैसे कोई भक्त, अपने भगवान की सेवा के दौरान होता है।


मैं किसी स्त्री के साथ सशरीर होना,

उस स्त्री को पाना कदापि नहीं मानता,

उस स्त्री के ह्रदय में बस जाने को मानता हूँ।

ईश्वर की मूर्ति रख लेने से ईश्वर हमारा नहीं होता,

हृदय में रखकर पूजने से होता है।

मैं तुम्हें पाना नहीं चाहता..

मैं तुम्हारा हो जाना चाहता हूँ।

मैं समर्पण को प्रेम से बढ़कर मानता हूँ, समर्पण प्रेम का प्रतिरूप नहीं है, प्रेम समर्पण का प्रतिरूप है।

#Nilesh.

हाल कैसा हैं ।

हाल कैसा हैं ।

आओ बैठो पास तो बताऊं , हाल कैसा है ..
दूर से पूछोगे तो अच्छा ही कहूंगा ..
ख़ैर छोड़ो ..
पास आने में तकलीफ़ हैं ..
तो कभी टाइम निकाल वक्त पे रिप्लाई करो तो बताऊं हाल कैसा है ।
यू तो कइयो ने दिल दुखाया है मेरा ,
पर कभी फुरसत में वक्त मिले तो पूछना तब बताऊं हाल कैसा है ।
दूर से पूछोगे तो अच्छा ही कहूंगा ।

मैं मैसेज करू घंटो रिप्लाई न आये
जब रिप्लाई आए तो , क्या बताऊँ हाल कैसा है ।
कभी पास बैठो तो बताऊं हाल कैसा है ।

जब पूछो बोलती हो इंस्टाग्राम ओपन नही की थीं ,
तो यू फेसबुक पे किसी और की फ़ोटो लाइक न करो तो बताऊं हाल कैसा है।

यूं तो कइयो बहाने है मेरे पास भी ,
कभी सिर्फ़ मेरे लिए ही इंस्टाग्राम ओपन करो तो बताऊं हाल कैसा है ।😊