निर्मला ( मुंशी प्रेमचंद ) की कहनी का review

मुझे तुम चाहिए, पूरे के पूरे !

मुझे तुम चाहिए, पूरे के पूरे,

उससे कम पर नहीं चलेगा मेरा काम |

मुझे चाहिए तुम्हारा हड़बड़ाना

जब हो रही हो देर ।

और रोक लेना कभी कभी

यूँ बोल के की देर तो हो ही चुकी ।

मुझे जब दे रहे हो सबकुछ तो

तुम्हारा बेवजह किसी बात पर गुस्सा होना भी मिलना चाहिए।

और बिना बात पागलों की तरह ठहाका लगाना भी मिलना चाहिए ।

मुझे दिल्ली और तुम्हारा गाँव चाहिए।

जमीं चलने को और उड़ तुम्हारे पास आने को आसमान चाहिए ।

मुझे नदी चाहिए और उसपे चलती नाव चाहिए ।

मैं हिस्सों में नहीं पहचानता तुम्हें मुझे पूरा का पूरा इंसान चाहिए ।

#Nilesh.

लड़की

मां अर्थात माता के रूप में नारी, धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे….

किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है। सब धन-लिप्सा व अपने स्वार्थ में डूबते जा रहे हैं। परंतु जन्म देने वाली माता के रूप में नारी का सम्मान अनिवार्य रूप से होना चाहिए, जो वर्तमान में कम हो गया है, यह सवाल आजकल यक्षप्रश्न की तरह चहुंओर पांव पसारता जा रहा है। इस बारे में नई पीढ़ी को आत्मावलोकन करना चाहिए |

#Nilesh