लड़की

मां अर्थात माता के रूप में नारी, धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे….

किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है। सब धन-लिप्सा व अपने स्वार्थ में डूबते जा रहे हैं। परंतु जन्म देने वाली माता के रूप में नारी का सम्मान अनिवार्य रूप से होना चाहिए, जो वर्तमान में कम हो गया है, यह सवाल आजकल यक्षप्रश्न की तरह चहुंओर पांव पसारता जा रहा है। इस बारे में नई पीढ़ी को आत्मावलोकन करना चाहिए |

#Nilesh

Kuchh baten

हम जिनके करीब होते हैं,उनके सुख-दुःख हमारे जीवन के भी अभिन्न अंग बन जाते हैं। कभी हमारी वजह से ही वे मुस्करातें हैं तो कई बार चेहरे की उदासी हमारी वजह से ही होती है। ये सब चलता रहता है,हमे बस उस सम्बन्ध के बीच के द्रव को नही सूखने देना है। हमे बचाये रखना है मुट्ठी भर प्रेम।

#Nilesh