मुझे तुम चाहिए, पूरे के पूरे !

मुझे तुम चाहिए, पूरे के पूरे,

उससे कम पर नहीं चलेगा मेरा काम |

मुझे चाहिए तुम्हारा हड़बड़ाना

जब हो रही हो देर ।

और रोक लेना कभी कभी

यूँ बोल के की देर तो हो ही चुकी ।

मुझे जब दे रहे हो सबकुछ तो

तुम्हारा बेवजह किसी बात पर गुस्सा होना भी मिलना चाहिए।

और बिना बात पागलों की तरह ठहाका लगाना भी मिलना चाहिए ।

मुझे दिल्ली और तुम्हारा गाँव चाहिए।

जमीं चलने को और उड़ तुम्हारे पास आने को आसमान चाहिए ।

मुझे नदी चाहिए और उसपे चलती नाव चाहिए ।

मैं हिस्सों में नहीं पहचानता तुम्हें मुझे पूरा का पूरा इंसान चाहिए ।

#Nilesh.

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4 thoughts on “मुझे तुम चाहिए, पूरे के पूरे !

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